First Ever Nari Sansad Concludes today at Parmarth Niketan, Rishikesh

Oct 09 2022

First Ever Nari Sansad Concludes today at Parmarth Niketan, Rishikesh

The second day of the first ever Nari Sansad (Women’s Parliament) concludes with Chief Guest Hon’ble Governor of Kerala Dr Arif Mohammad Khan Saheb, President of Parmarth Niketan  PujyaSwami Chidanand Saraswatiji, Environmentalist Dr. Vandana Shivaji, Dr. Sadhvi Bhagawati Saraswatiji, Mayor Rishikesh Smt. Anita Mamgain and others

Pujya Swami Chidanand Saraswatiji dedicated the tricolor made of bamboo and khadi to the Honorable Governor of Kerala Dr Arif Mohammad Khan Saheb he was conferred with Nataraj Award for his exceptional service to the Nation

They were presented with resolution letter for building a world free from terrorism by delegates of Nari Sansad

Environmentalist Dr. Vandana Shiva ji, Dr. Rajesh Sarwadya from Vivekananda Youth Connect, leading the Ganga Sustainability Run in Rishikesh, Industrialist, Philanthropist & Humanitarian Shri Vinod Bagrodia ji, Yamuna Action Parivar’s Shri Kapil Gargji and Professor Dr. Rachna Bimal ji were honored with Nataraj Award for their important contribution in diverse arenas of selfless service by Hon’ble Governor of Kerala and Pujya Swamiji.

Rishikesh, 9 October. The second day of ‘Nari Sansad’ Shakti Mahakumbh organized in Parmarth Niketan was inaugurated by the Chief Guest Hon’ble Governor of Kerala, Shri Arif Mohammad Khan Saheb, President of Parmarth Niketan Pujya Swami Chidanand Saraswati ji and all the distinguished guests by lighting the lamp.

In the morning session of ‘Nari Sansad’ detailed discussion was held in Vedic culture, Sanatan culture, traditions, scriptures, Puranas and Devi Purana about women’s glory, duties, rights.

Honorable Governor of Kerala, Dr Arif Mohammad Khan Saheb while thanking the organisers for conducting the Nari Sansad said that we become indifferent to the things which we get easily. We have got our maternal power in the form of mother, sister, wife and daughter, so we underestimate their importance. We forget the work done by them.

He added, “Mahatma Gandhiji said that God is Truth and then he finally concluded that Truth is God. Similarly we say Shakti is Lakshmi, Saraswati and Durga but today we must see Lakshmi, Saraswati and Durga in our Shakti. The problem affecting women are not only women’s problems. Their problems, hurdles and struggles are ours. It is critical for men to understand this involves and affects them, our society and our nation”

Explaining the importance of education, he said that if girls are educated like boys, then they too can do everything. Whatever difference there is between boys and girls is due to education. He added that we have to give equal education to daughters and sons in our homes as well.

He said that women have a big hand in the oppression of women. Our attitude should be the same with daughter and daughter-in-law.

Pujya Swami Chidanand Saraswati ji said that women need respect not conforming to a set ideal. He added, “Women need a safe environment to stand on their feet.”

Dr. Sadhvi Bhagwati Saraswati ji led three pledges today, “If we truly want to work for the cause of women empowerment, let us take three pledges today from this pandal first that we will not promote or buy fairness creams. We will accept our women and girls in their beauty as they are. Second we will work to break the taboos around menstruation and as women not speak about our periods as though it is dirty happening rather be proud that this is part of our ability to bring forth creation through our bodies. Third we will ensure that we understand equal does not mean the same. Women are equal to men, meaning they should have equal rights and equal opportunities, equal access to education and resources but they are not same to men. We must appreciate their unique strengths and contributions.”

Environmentalist Dr. Vandana Shiva ji said, “India’s culture is a culture of unity in diversity and that culture is clearly visible in Parmarth Niketan. Not every culture called rivers as mother, but India has given rivers the status of mother. Our culture has understood that water of rivers is not just water but it has divine energy. Working in harmony with nature is innate to women especially in our villages. We must learn from this wisdom and from these women to protect the Divine Mother.”

She informed that a seeds conservation campaign is being started at 1050 places and work is being done to save the extinct seeds from these centers. Gave information about organic farming, neem plants and organic pesticides.Referring to the Chipko movement, she said that the women agitating at that time said that there is power in nature; The power which is in the universe is there in all of us.

Mayor Rishikesh Smt. Anita Mamgai said that our Ganga Maa and Bharat Mata are the symbol of Shakti. Thanking Pujya Swamiji for organizing Nari Sansad, he said that since years, Parmarth Niketan is doing amazing work for the education and health of women and children by visiting Rishikesh and nearby slum areas, which is exemplary and that such an idea to host a Women’s Parliament could only be something that Pujya Swamiji could conceive and inspire.

Pujya Swamiji felicitated the Honorable Governor of Kerala Dr Arif Mohammad Khan Saheb by presenting a divine plant of Rudraksha, angavastra, literature and Nataraj memento.

They conferred certificates to other the distinguished Vice Chancellors, guests and participants who participated in the Women’s Parliament.

This program was organized under the joint aegis of Parmarth Niketan, Divine Shakti Foundation, in association of Mata Lalita Devi Trust.

नारी संसद

दीप प्रज्वलन के साथ भारतीय नारी-घर और बाहर के दूसरे दिन का शुभारम्भ

मुख्य अतिथि माननीय राज्यपाल, केरल श्री आरिफ मोहमम्द खान साहब, परमार्थ निकेतन के अध्यक्ष स्वामी चिदानन्द सरस्वती जी, पर्यावरणविद् डा वंदना शिवा जी, डा साध्वी भगवती सरस्वती जी, मेयर ऋषिकेश श्रीमती अनीता ममगाई जी, समाजसेवी श्री विनोद बागरोड़िया जी, श्री रविशंकर तिवारी जी का विशेष उद्बोधन

बांस और खादी से निर्मित तिरंगा माननीय राज्यपाल केरल श्री आरिफ मोहम्मद खान साहब को किया समर्पित
माननीय राज्यपाल केरल नटराज पुरस्कार से सम्मानित
आंतकवाद से मुक्त विश्व के निर्माण हेतु संकल्प पत्र किया प्रस्तुत

माननीय राज्यपाल केरल और स्वामी चिदानन्द सरस्वती जी द्वारा पर्यावरणविद् डा वंदना शिवा जी, गंगा सस्टेनेबिलिटी रन हेतु डा राजेश सर्वज्ञ, चिकित्सा सेवा में महत्वपूर्ण योगदान देने वाले श्री विनोद बागरोडिया जी और डा रचना बिमल जी को नटराज पुरस्कार से किया सम्मानित

ऋषिकेश, 9 अक्टूबर। परमार्थ निकेतन में आयोजित ‘नारी संसद’ शक्ति महाकुम्भ के दूसरे दिन का आगाज़ मुख्य अतिथि माननीय राज्यपाल, केरल श्री आरिफ मोहमम्द खान साहब, परमार्थ निकेतन के अध्यक्ष स्वामी चिदानन्द सरस्वती जी एवं सभी विशिष्ट अतिथियों ने दीप प्रज्वलित कर किया। ‘नारी संसद’ भारतीय नारी-घर और बाहर के प्रातःकालीन सत्र में  वैदिक संस्कृति, सनातन संस्कृति, परम्पराओं, शास्त्रों, पुराणों और देवी पुराण में नारी की महिमा, कर्तव्य, अधिकारों, स्वाभिमान से युक्त नारी के विषय में विस्तृत चर्चा की।

माननीय राज्यपाल, केरल श्री आरिफ मोहम्मद खान साहब ने नारी संसद आयोजित करने हेतु साधुवाद देते हुये कहा कि जो वस्तुयें हमें सुलभता से मिलती है हम उनके प्रति उदासीन हो जाते हंै। हमारी मातृ शक्ति माँ, बहन, पत्नी और बेटी के रूप में हमें मिली हंै इसलिये हम उनका महत्व कम कर देते हैं। उनके द्वारा किये गये कार्यो को हम भूल जाते हैं। शास्त्रों में बहुत ही सुन्दर शब्द है सुमिरन हमें भी नारियों के विषय में सुमिरन करने और कराने की जरूरत हंै। उन्होंने परोपकार के महत्व की भी व्याख्या करते हुये कहा कि उपकार करना ही पुण्य है और अत्याचार करना ही पाप है।

इस अवसर पर उन्होंने जयदेव जी की गीता का वर्णन करते हुये कहा कि शास्त्रों में भगवान श्री कृष्ण को पूर्ण पुरूष कहा गया है परन्तु जब वे एक बार यमुना जी के तट पर गये तो अन्धकार से वे डर गये तब वे राधा जी के पास गये अर्थात पूर्ण पुरूष को भी मातृ शक्ति के सहयोग की आवश्यकता पड़ी तो हम सब तो साधारण है इसलिये मातृशक्ति की महत्व को स्वीकार करना होगा। हम कहते है महिला लक्ष्मी है अब समय आ गया है कि हम स्वीकार करें कि लक्ष्मी महिला है, सरस्वती महिला है और इसे स्वीकार करने में किसी को भी कठिनाई नहीं होनी चाहिये।

उन्होंने कहा कि महिलाओं को मासिक धर्म होना एक शारीरिक बात है परन्तु ऐसी जो भी समस्यायें है वह समाज की समस्यायें है अतः महिलाओं की समस्याओं को लेकर इन्हें नजरअन्दाज नहीं किया जा सकता बल्कि यह तो पूरे परिवार और समाज की समस्या है।

महिलाओं ने तो वेदों की रचान की है परन्तु समय के साथ महिलाओं को चार दीवारी के अन्दर बंद करके रखा गया। पुरूषों को अपना भला, आने वाली पीढ़ियों का भला और समाज का भला करने के लिये महिलाओं की समस्याओं को स्वीकार करना और समाधान करना होगा।

उन्होंने शिक्षा के महत्व को बताते हुये कहा कि लड़कियों को भी लड़कों की तरह शिक्षित किया जाये तो वह भी हर कार्य कर सकती हंै। लड़के और लड़कियों में जो भी अन्तर है वह शिक्षा के कारण है। हमें अपने घरों में भी बेटी और बेटों को समान शिक्षा देनी होगी। उन्होंने कहा कि नारी के उत्पीडन में नारी का ही बहुत बड़ा हाथ है। हमारा रवैया बेटी और बहू के साथ समान होना चाहिये। उन्होंने कहा कि मैने अपने बेटे के निकाह नामे में कुछ शर्ते लिखवायी थी तब लोगों ने कहा कि यह आप अपने खिलाफ ही लिख रहे हैं परन्तु मैं अपनी बहू को अपनी बेटी ही मानता हूँ।

उन्होंने इस अवसर पर भक्ति कवियों द्वारा लिखित रचनाओं का वर्णन करते हुये कहा कि उन रचनाओं में नारी शक्ति की अद्भुत व्याख्या की गयी है। महिलाओं में किसी भी प्रकार की क्षमता की कमी नहीं है आज हमारी बेटियां भी फाइटर प्लेन चला रही है। शास्त्रों में उल्लेख है कि अपनी आत्मा और अपने आप को उपर उठने के लिये प्रयत्न करें। जीवन का उद्देश्य सुख की प्राप्ति नहीं बल्कि ज्ञान की प्राप्ति है, जिस दिन ज्ञान प्राप्त हो जायेगा उस दिन आप विभेद करना भूल जायेगे। मैं कहां पैदा हुआ हूँ और किस रूप में पैदा हुआ हूँं यह मेरे हाथ में नहीं है परन्तु पौरूष करना हमारे हाथ में हैं।

स्वामी चिदानन्द सरस्वती जी ने कहा कि नारियों को सामना नहीं सम्मान चाहिये। उन्हें अपने पैरों पर खड़े होने के लिये एक सुरक्षित वातावरण चाहिये।

डा साध्वी भगवती सरस्वती जी ने कहा यदि हम वास्तव में एक सशक्त राष्ट्र का निर्माण करना चाहते है तो हमें स्वीकार करना होगा कि हम जिनकी पूजा करते है उन्हीं बेटियों को यह भी बताते है कि माँ काली की तरह नहीं बल्कि गौरवर्ण की तरह होना चाहिये।ं हम बेटियों को फेयर बनने की शिक्षा देते हंै तब हम कैसे सशक्त समाज का निर्माण कर सकते है। हम सम्मेलनों में महिला सशक्तिकरण और समानता के बारे में बात करते हैं परन्तु इसे विचारों और सोच में स्थान देना होगा तभी हमारे ये कार्यक्रम सफल हो सकते हंै। समानता का मतलब लड़कियांे को लडकों के जैसे बात करना, कपड़े पहनना नहीं है बल्कि जिस प्रकार धरती पर गुलाब और गेंदा अलग-अलग है उसी प्रकार हमारे समाज में विविधता है उस विविधता को स्वीकार करते हुये समानता को स्वीकार करना होगा।

पर्यावरणविद् डा वंदना शिवा जी ने कहा कि भारत की संस्कृति विविधता में एकता की संस्कृति हैं और परमार्थ निकेतन में स्पष्टता से उस संस्कृति के दर्शन हो रहे हैं। हर संस्कृति ने नदियों को माँ नहीं कहा परन्तु भारत ने सभी नदियों को माँ का दर्जा दिया है। नदियों का पानी केवल पानी नहीं है बल्कि उसमें शक्ति है।

इस अवसर पर उन्होंने माँ भागीरथी जी का पृथ्वी पर अवतरण के प्रसंग को साझा करते हुये कहा कि हमारी नदियां, जंगल और जल हमारी दिव्य संपदा हंै। उन्होंने बताया कि 1050 स्थानों पर बीज संरक्षण अभियान शुरू है और इन केन्दों से विलुप्त हो रहे बीजों को बचाने का कार्य किया जा रहा है। जैविक खेती, नीम के पौधे और जैविक नाशकों के विषय में जानकारी दी।

डा शिवा ने कहा कि प्रकृति के साथ काम करना ही महिला शक्ति है और यही आज की जरूरत है। चिपको आन्दोलन का उल्लेख करते हुये कहा कि उस समय आन्दोलनकर्ता महिलाओं ने कहा कि जो प्रकृति में शक्ति है; जो बह्मण्ड में शक्ति है वही हम सभी में है। प्रकृति का स्वास्थ्य और हमारा स्वास्थ्य जुड़ा हुआ है। उन्होंने कहा भूले-बिसरे अनाज में पोषण है इसलिये हमें इनको पुनः स्वीकार करना होगा। मुझे परमार्थ निकेतन में आकर पूज्य स्वामी जी और साध्वी के सान्निध्य में अत्यंत प्रसन्नता होती है।

मेयर ऋषिकेश श्रीमती अनीता ममगाई जी ने कहा कि हमारी गंगा मां और भारत माता मातृशक्ति का प्रतीक है। नारी संसद के आयोजन हेतु उन्होंने पूज्य स्वामी जी को धन्यवाद देते हुये कहा कि परमार्थ निकेतन द्वारा वर्षो से ऋषिकेश और आस-पास की स्लम ऐरिया में जाकर नारियों और बच्चों की शिक्षा और स्वास्थ्य के लिये अद्भुत कार्य किये जा रहे हैं जो की अनुकणीय है और यही वास्वत में नारी संसद का प्रतीक भी है।

स्वामी चिदानन्द सरस्वती जी ने माननीय राज्यपाल केरल श्री आरिफ मोहम्मद खान साहब को रूद्राक्ष का दिव्य पौधा, अंगवस्त्र, सद्साहित्य, स्मृति चिन्ह भेंट कर अभिनन्दन किया।

नारी संसद में सहभाग करने वाले सभी विशिष्ट अतिथियों एवं सहभागियों को हिमालय की हरित भेंट रूद्राक्ष का पौधा भेंट किया।

कार्यशाला में सहभाग करने वाले प्रतिभागियों ने परमार्थ निकेतन में आयोजित सभी आध्यात्मिक कार्यक्रमों और गंगा जी की आरती में सहभाग कर आनन्द लिया। यह कार्यक्रम परमार्थ निकेतन और माता ललिता देवी ट्रस्ट के संयुक्त तत्वाधान में परमार्थ निकेतन में आयोजित किया गया।

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