“Spirit of Life”, Dainik Jagran
बुरे कर्मों का नहीं, बुरी आदतों का नतीजा हो सकते हैं रोग...
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Read Moreहम मृत्यु से कैसे निपटिंगे? हमें उन व्यक्तियों के प्रति कैसा व्यवहार करना चाहिए, जिनकी मृत्यु हो चुकी है?...
Read Moreहम सब इतना नकारात्मक क्यों सोचते हैं? हम इस नकारात्मक सोच के दायरे से कैसे बाहर निकल सकते हैं?...
Read MoreThis article was published in Thrive Global, here. If God made us perfectly, why do we practise pratyahara, or the withdrawal of the senses? God gave us eyes to see, ears to hear, a nose to smell, hands to touch, a tongue to taste. So why...
Read Moreहमारे बच्चे जैसे-जैसे बड़े होते है, हमें उन्हें कैसे कंट्रोल करना चाहिए? जैसे जब वे कॉलेज जाने की शुरुआत करें, तो उनपर हमारा नियंत्रण कैसा है?...
Read MoreThis article was published in Dainik Jagran, here. मस्तिष्क को प्रशिक्षित क्यों किया जाना चाहिए ?मस्तिष्क हमारे शरीर का बेहद अहम अंग है। बस जरूरत है इसको प्रशिक्षित कर, समझदार बनाने की। मैं लड़ाई या संघर्ष जैसे अर्थ देने वाले शब्दों को नजरअंदाज ही करती हूं, क्योंकि...
Read Moreमस्तिष्क को प्रशिक्षित क्यों किया जाना चाहिए?...
Read MoreThis article was published in Dainik Jagran, here. कर्म और धर्म में क्या अंतर है?दोनों कॉन्सेप्ट एक-दूसरे से बड़ी गहराई के साथ जुड़े हुए हैं। ये सवाल बिल्कुल वैसा ही है, जैसे जीवन के लिए श्वांस और खून में क्या अंतर है? हम यहां ये कह...
Read MoreThis article was published in The Speaking Tree, here. The idea is not to control or subdue the mind with a whip. The mind simply needs to be trained to work for us rather than against us. The mind is a beautiful tool, organ and muscle...
Read Moreकर्मा और धर्म में क्या अंतर है?...
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